श्री गोदाहरिदेव दिव्यदेश

वृन्दावन धाम में स्थित करोडों लोगों की श्रद्धा एवं आस्था के प्रतीक, वास्तुकला की मिसाल तथा हमारी संस्कृति की पहचान “श्री गोदाहरिदेव दिव्यदेश मन्दिर, वृन्दावन धाम” आपका स्वागत करता है | कई दशकों से इस मन्दिर ने अनेक इतिहासकारों तथा पुरातत्वविदों को अपनी और आकर्षित किया है | भक्तगण लाखों की संख्या में ब्रह्मोत्सव के पर्व पर अपने आराध्य की प्रतिमा-द्वय के दर्शनों के लिए उमड़ पड़ते हैं।

अभिनव दिव्यदेश निर्माण होने के पश्चात दिव्यदेश मन्दिर में विराजमान श्री वैकुण्ठ नाथ भगवान, श्री महालक्ष्मी, श्री सुदर्शन भगवान, श्रीन्रसिंह भगवान, श्री वेंकटेश भगवान, श्री लक्ष्मीनारायण भगवान, श्री वेणुगोपाल भगवान, श्री रामानुज स्वामी, श्री गोदाम्बादेवी के पवित्र दर्शनों के लिए भक्तगण लालायित रहते हैं | दिव्यदेश मन्दिर की सेवा पाच्चरात्रागम के अनुसार होती है | दिव्यदेश में नित्य उत्सव की प्रधानता है |

श्री गोदाहरिदेव मन्दिर अति प्राचीन है | इसके संस्थापक अनंत श्री विभूषित वेदांत शिरोमणि श्री रामानुजाचार्य स्वामीजी थे | श्री हरिदेव मन्दिर के द्वितीय आचार्य श्री अनंत श्री समलंकृत स्वामी कमलनयनाचार्यजी महाराज ने मन्दिर के महान उत्सव प्रारम्भ कर संचालन किया | सदाचार्य पाटोत्सव, श्री शरद महोत्सव अब भी संपन्न होते रहते हैं |

त्रिपद विभूति नायक सर्वेश्वर प्रभु के प्रिय भक्तजनों की प्रार्थना से पूर्व के सदाचार्य महानुभावों की दिव्य संकल्प की पूर्ति हेतु धाम श्री वृन्दावन में श्री वैकुंठनाथ भगवान विराजमान हो गए हैं | अर्चविग्रहों की दिव्य सनिन्धियाँ हैं | प्रभु श्री वैकुंठनाथ के दिव्य दर्शन अति आकर्षक है | प्रधानद्ववार पूर्व दिशा की तरफ़ है | मन्दिर दिव्यदेश की एक बड़ी परिक्रमा है | भीतर गोपुरम के दो परिक्रमा और हैं |

मन्दिर में व्यवस्था हेतु ट्रस्ट के सदस्य एवं श्री वैष्णव जन बराबर प्रयत्नशील हैं एवं दिव्यदेश के नियोत्सव में उत्साह के साथ सम्मिलित एवं सहयोग कर दर्शन लाभ प्राप्त करते हैं | श्री मन्नारायण भगवान सबका कल्याण करें |

श्री ज.गु. रा. त्रिदंडी स्वामी श्री देवनारयानाचार्य
अध्यक्ष
ट्रस्ट ठाकुर श्री हरिदेवजी महाराज




     
 
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